प्रीती वेल्हेकर रामटेके (विस्तार अधिकारी,चंद्रपुर) यांची अप्रतिम कविता “चलो बुद्ध की और”

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चलो बुद्ध की और…

कीतनी सुकून की जिंदगी जी रहे हैं हम,
संविधान की वजह से !!
हा, कही किसिका सामना दुःख से होता भी होगा !
क्यूकिं अभी हमने अपनाया कहा हैं,
बुद्ध को पुरी तरहा से !!

दुःख से मुक्त होना हैं तो,
हमें बुद्ध को अपनाना होगा !
जरा कल्पना कर के देखो वो समाज की,
जहा समाधान सुख से बाते करता होगा !!

मैं ऐसा समाज चाहती हू,
जहा हक और अधिकार जताने न पडे,
वहा सब मिलके काम करे,
एक दुसरे के लिये !!

यहाँ नितीमत्ता लानी होगी,
ताकी कानुन और कायदों की जरुरत न पडे!
और ये आयेगी कहां से,
ये बुद्ध से ही तो आयेगी !!

संविधान से सुकून की जिंदगी जी रहे है,
तो सोंचो उसके आगे की जिंदगी कैसी होगी !!
बुद्ध कहते हैं आओ, अनुभव करो…
और तुम भी बन जाओ बुद्ध,
बुद्ध बनने के लिये यहाँ पाबंदी नही होगी !!

हर इन्सान बुद्ध बनने की क्षमता रखता हैं,
पहले वो खुद को समझे की वो इंसान हैं !
ये पहली सिडी हैं बुद्ध के मार्ग की,
फिर साधना के पथ पर चला चल…
देख तेरी मंजिल करिब होगी!!

और कोई भी इस रचना कों,
संप्रदाय और धर्म की मर्यादा में न तोले!!
ये भवतु सब्ब मंगलंम का मार्ग हैं,
सदा सब के लिये, बुद्ध मुझसे बोलें…
ये भवतु सब्ब मंगलंम का मार्ग हैं,
सदा सब के लिये, बुद्ध मुझसे बोले….

प्रीती वेल्हेकर रामटेके
विस्तार अधिकारी
चंद्रपूर

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