मिलिंद नगर बुद्ध विहार मे मनाई आषाढ पौर्णिमा…

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मिलिंद नगर बौद्ध विहार, पठाणपूरा वॉर्ड, चंद्रपूर मे वर्षावास के उपलक्ष मे आषाढ पौर्णिमा मनाई गयी और आदरणीय भन्ते को जीवनावश्यक वस्तू का दान दिया गया

◆कार्यक्रम की सुरवात वंदना और परित्राण से हुई
◆आदरणीय भन्ते पचूपन्ना और अमंतन को फल और जीवनावश्यक वस्तू का दान दिया गया
◆भन्ते पचूपन्ना ने वर्षावास पे प्रवचन दिया और बताया की वर्षावास का महत्व 2500 साल पहले का है, तथागत भगवान बुद्ध खुद हर साल वर्षावास करते थे और धम्म की वाणी बताते थे.
◆ वर्षा मतलब बारीश और वास मतलब निवास, उस समय भन्ते को बारीश के दिन एक जगह से दुसरी जगह जाने के लिये बहुत तकलीफ होती थी और इसलीये वो एक गाव मे 3 महिने रेहकर धम्म की वाणी बताते थे और मार्गदर्शन करते थे.
◆ अंत मे मिलिंद नगर बुद्ध विहार के अध्यक्ष मोंटो मानकर ने बताया की बुद्ध की अहिंसा को हमे समझना चाहीये, बुद्ध की अहिंसा मतलब, हिंसा करणे की इच्छा और गरज इसके बीच का मध्यम मार्ग मतलब बुद्ध की अहिंसा और आगे वर्षावास और आषाढ पौर्णिमा मे विस्तृत मार्गदर्शन किया.
◆IT इंजि आदित्य ताकसांडे का जन्मदिन भी विहार मे मनाया गया.
◆कार्यक्रम मे सिद्धान्त रामटेके कोषाध्यक्ष, पवित्रा ताकसांडे महासचीव, गुड्डी रामटेके सचीव, विक्रांत वाघमारे, सलोनी पडवेकर आदित्य ताकसांडे, माहिनी मून, आदी उपस्थित थे.

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